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मशहूर उर्दू ग़ज़ल

• अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है!

ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है!!

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में!

यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है!!

मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन!

हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है!!

हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है!

हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है!!

जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे!

किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है!!

सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में!

किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है!!

 

• उलझ करके तिरी ज़ुल्फ़ों में यूँ आबाद हो जाऊँ!

कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ!!

मैं जमना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक!

कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ!!

तेरी पाकीज़गी के बस ज़रा सा पास आना है!

अयोध्या तू रहे मैं सिर्फ़ फ़ैज़ाबाद हो जाऊँ!!

ग़ज़ल कहने लगा हूँ मैं ज़रा सा मुस्करा तो दो!

यही तो चाहती थीं तुम कि मैं बरबाद हो जाऊँ!!

न जाने किसकी बाहों में तुम्हारी ज़िन्दगी गुज़रे!

मुझे इतना ना पढ़ लेना कि तुमको याद हो जाऊँ!!

भरोसे को जताने का यही है रास्ता बाक़ी!

तुझे बरबाद करके ख़ुद भी मैं बरबाद हो जाऊँ!!

 

• एक पल में एक सदी का मज़ा हमसे पूछिए!

दो दिन की ज़िन्दगी का मज़ा हमसे पूछिए!!

भूले हैं रफ़्ता-रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम!

किश्तों में ख़ुदकुशी का मज़ा हमसे पूछिए!!

आगाज़े-ए-आशिक़ी का मज़ा आप जानिए!

अंजाम-ए-आशिक़ी का मज़ा हमसे पूछिए!!

जलते दीयों में जलते घरों जैसी लौ कहाँ!

सरकार रोशनी का मज़ा हमसे पूछिए!!

वो जान ही गए कि हमें उनसे प्यार है!

आँखों की मुखबिरी का मज़ा हमसे पूछिए!!

हँसने का शौक़ हमको भी था आप की तरह!

हँसिए मगर हँसी का मज़ा हमसे पूछिए!!

हम तौबा करके मर गए क़ब्ले – अज़ल ” ख़ुमार”!

तौहीन – ए -मयकशी का मज़ा हमसे पूछिये!!

 

• ना अब वो महफ़िल रही!

ना अब वो मयखाने रहे!!

ना पहले से वो सनम रहे!

ना हम पहले से दीवाने रहे!!

ना वो दोस्त ही रहे बाकी!

ना मिलने के वो ठिकाने रहे!!

साथ गमों का जखीरा रहा!

कुछ यादों के खंडहर पुराने रहे!!

ना उन्हें कोई शिकायत रही!

ना हमारे भी अब वो बहाने रहे!!

कितने ही नगमे नए आए!

अपने लबों पे किस्से पुराने रहे!!

ता-उम्र उसके शहर में, यारो!

अनजाने थे, हम अनजाने रहे!!

कुछ अपनों के हुम ना हुए!

कुछ अपने हमसे बेगानें रहे!!

इतना लुटा कर भी ‘बेख़बर!

मेरे पासँ गमों के खजाने रहे!!

 

 

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